यूरेनियम कार्पोरेशन वर्करों को मिली जीत, हड़़ताल के बाद हुआ वेतन समझौता

वेतन पुनरीक्षण समेत विभिन्न मांगों को लेकर झारखंड में जमशेदपुर के जादूगोड़ा स्थित यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसिल) के तुरामडीह खदान में हड़ताल समाप्त हो गई है।

इस सरकारी कंपनी के यूरेनियम प्रोसेसिंग यूनिट में मैनेजमेंट और मज़दूरों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में वेतन समझौते पर शनिवार को हस्ताक्षर हुए।

सूत्रों के अनुसार, वर्करों को बेसिक का 12 प्रतिशत लाभ दिया जाएगा और अन्य मांगों पर अगले 15 दिनों में वार्ता के जरिए सहमति बनाई जाएगी।

मज़दूरों के कुछ अन्य गुटों ने इस समझौते पर असंतोष ज़ाहिर किया है और इसे दशकों में सबसे ख़राब समझौता बताया है।

उनका कहना है कि कंपनी की ओर से जो अन्य भत्ते दिए जाते हैं उस पर फैसला लेना चाहिए था।

इस समझौता वार्ता में जमशेदपुर के सांसद एमपी बिद्युत बारन महतो, एमएलए छमपाई सोरेन, एमएलए मेनका सरदार, ज़िला परिषद बुलुरानी सिंह, यूसीआईएल के सीएमडी सीके असनानी, कंपनी के वित्तीय निदेशक देाशीष घोष, डीजीएम रवींद्र कुमार, डीजीएम एसके शर्मा, मैनेजर जीसी नायक और कंपनी में सक्रिय सभी चारों यूनियन के नेता मौजूद थे।

अनिश्चितकालीन हड़ताल

गौरतलब है कि यूसीआईएल कर्मचारियों के द्दारा वेतन पुनरीक्षण समेत विभिन्न मांगों को लेकर जादूगोड़ा स्थित तुमराडीह खदान में कई दिनों से हड़ताल जारी थी।

हड़ताल के दौरान खदान में करीब 140 मीटर नीचे हड़ताल पर बैठे 54 कर्मचारियों में से एक मज़दूर की आचानक तबीयत बिगड़ने के कारण तनावपूर्ण माहौल हो गया था।

ये मज़दूर खदान में ही बेहोश हो गया था, जिसका नाम बेलिया सोरेन बताया जा रहा है।

यही नहीं जब अन्य दो मजदूरों की तबीयत खराब होने की खबर आई तो मज़दूर थोड़ा आक्रोशित हुए और माइंस के बाहर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।

स्थिति को देखते हुए आनन-फानन में बेलिया को टीएमएच (टाटा मुख्य अस्पताल) में भर्ती कराया गया।

मजदूरों के करीब दो हजार परिजन माइंस गेट के सामने जमा होकर प्रदर्शन करने लगे और शिफ्ट चेंज कर रहे सीआइएसएफ़ के जवानों को भी मजदूरों ने अंदर रोक दिया।

वार्ता के दौरान मजदूर अपनी मांग पर डटे रहे

इससे पहले जमशेदपुर से पूर्वी सिंहभूम जिला के एडीएम लॉ एंड आर्डर सुबोध कुमार व डीएसपी लॉ एंड आर्डर आलोक रंजन ने समझौते कराने का प्रयास किया था, लेकिन मजदूर प्रबंधन से अपनी मांगों पर सहमति के बिना हटने को तैयार नहीं हैं।

हड़ताल के दौरान कुछ समय के लिए आक्रोशित मजदूरों व परिजनों ने तुरामडीह माइंस गेट को जाम कर दिया था।

वे कंपनी के अधिकारी को भी नहीं निकलने दे रहे थे, लेकिन किसी तरह अधिकारी पिछले दरवाजे से निकल पाए थे।

हड़ताली मजदूरों के लिए बनी 40 किलो की खिचड़ी

हड़ताल के दौरान तुरामडीह यूरेनियम खदान के 140 मीटर नीचे हड़ताल पर बैठे 54 मजदूरों के लिए यूनियन कार्यालय में खिचड़ी बनाई गई।

शाम सात बजे खिचड़ी के लिए 40 किलो चावल के अलावा 15-15 किलो हरी सब्जी, आलू और दाल मंगाई गई।

सहायक श्रमायुक्त प्रवीण कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच कई बार वार्ता कराने की कोशिश की गई लेकिन दोनों पक्ष अपनी मांगों पर अड़े रहे.

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