मोदी का 6 साल पहले बनारस में दिए भाषण का वीडियो क्यों हो रहा है वायरल?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 6 साल पुराना एक वीडियो सोशल मीडिया पर पिछले 2 महीने से लगातार वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में मोदी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘रेलवे के निजीकरण की कोरी गप्प उड़ाई जा रही है…किसी भी रेल कर्मचारी से ज़्यादा मेरा रेलवे से रिश्ता रहा है….ऐसी सोच हमारी नहीं है।’

उल्लेखनीय है कि दोबारा सत्ता में आने के 1 महीने के अंदर नरेंद्र मोदी ने भारतीय रेलवे के साथ कारखानों को निगम बनाने की घोषणा कर दी।

इसका मतलब यह है कि इन कारखानों के कर्मचारी भारतीय रेलवे के कर्मचारी नहीं रह जाएंगे। रेलवे यूनियनों का आरोप है कि सरकार इन कारखानों को कारपोरेट घरानों के हवाले करने की कोशिश में है।

इसी महीने की 4 तारीख को मोदी सरकार ने देश की पहली निजी ट्रेन को पटरी पर उतार दिया है। तेजस एक्सप्रेस ट्रेन लखनऊ से दिल्ली और लखनऊ के बीच चलेगी। सरकार के इस कदम का यूनियने भारी विरोध कर रही हैं।

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क्या है इस वीडियो में-

दरअसल इस वीडियो में पीएम मोदी बनारस के डीएलडब्लू रेलवे कारखाने में, रेलवे कर्मचारियों की एक सभा में कह रहे हैं कि रेलवे का निजीकरण करने की अफवाह उड़ाई जा रही है।

25 दिसम्बर 2014 के आयोजन में उन्होंने कहा कि ‘उनसे अधिक रेलवे को कोई प्रेम नहीं करता, हम रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कभी नहीं जा सकते।’

लेकिन जैसे ही मोदी सरकार 2019 में वापस सत्ता में दोबारा आई इसने रेलवे के 7 कारखानों को निगम बनाने की घोषणा कर दी। सरकार का कहना था कि वो रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के इरादे से ऐसा कर रही है।

इसके अलावा रेलवे के सात कारखानों को निगम बनाने की घोषणा के बाद मोदी सरकार ने देश की पहली प्रइवेट ट्रेन तेजस को पटरी पर उतार दिया है।

तेजस एक्सप्रेस ट्रेन लखनऊ से दिल्ली और लखनऊ के बीच चलेगी, इसके बाद दूसरी प्राइवेट ट्रेन जल्द मुंबई से अहमदाबाद को बीच चलेगी।

सरकार के इस क़दम के खिलाफ यूनियनों का भारी विरोध लगातार जारी है।

जिस दिन तेजस को हरी झंडी दिखाई गई उस दिन आज ऑल इंडिया गार्ड काउंसिल के सभी कर्मचारियों ने काला दिवस मनाया।

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हजारों बेरोजगारों की छाती पर दौड़ेगी तेजस

आर्थिक मामलों के जानकार गिरिश मालवीय का कहना है कि दिल्ली और लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस वो पहली प्राइवेट ट्रेन है जो हजारों बेरोजगारों की छाती पर दौड़ेगी।

वहीं रेलवे के 7 कारखानों को तो मोदी सरकार ने पहले ही निगम बनाने की घोषणा कर दी थी और अब धीरे-धीरे पूरी रेलवे कॉपरेट के हाथों में जाती नज़र आ रही है।

निगमीकरण के बाद ग्रुप सी और डी का कोई भी कर्मचारी भारतीय रेलवे का हिस्सा नहीं होगा।

ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारी निगम के कर्मचारी हो जाएंगे जिनपर रेल सेवा अधिनियम लागू नहीं होगा और कांट्रैक्ट पर कर्मचारी रखे जाएंगे।

 अपनी ही कही बात से पलट गए पीएम मोदी

सरकार के इस दोहरे रवैये को देख सभी हैरान हैं, जहां एक तरफ पीएम मोदी ने कहा था कि वो रेलवे को निजी हाथों में नहीं जाने देगी। वहीं अब इसी सरकार ने एक-एक कर रेलवे को ऑउट सोर्स के हवाले करना शुरू कर दिया है।

अगर देखा जाए तो सरकार के इस फैसले से केवल रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों पर ही इसका असर नहीं पड़ेगा बल्कि आम जनता पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।

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