लेबर कोड के ख़िलाफ़ 9 सितंबर को देशव्यापी विरोध दिवस का आह्वान

मोदी सरकार के नए लेबर कोड को लाए जाने के खिलाफ ट्रेड यूनियनों ने 9 सितंबर को देशव्यापी विरोध दिवस मनाने का फैसला किया है।

मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान यानी मासा ने अपील की है कि मोदी सरकार ने अभूतपूर्व तरीके से मज़दूरों के अधिकारों पर हमला बोला है इसलिए इसका प्रतिरोध किया जाना चाहिए।

मासा ने अपील की है कि सभी मजदूर कामगार 9 सितंबर को अपने अपने इलाके में विरोध दिवस मनाए।

मासा ने पर्चा जारी कर कहा है कि 5 साल राज करने के बाद 2019 के आम चुनाव में मोदी सरकार द्वारा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई है।

अच्छे दिनों की आड़ में मज़दूर हुए बेहाल

पिछले 5 सालों में अच्छे दिन लाने का वादा करके इस सरकार ने देश का और देशवासियों का जो हाल किया है वह हम देख चुके हैं।

बेरोजगारी 45 सालों में आज सबसे अधिक है, महिलाएं आज कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं और लाखों की संख्या में गरीब और मंझोले किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं।

करोड़ों की संख्या में मज़दूर किसानों के जीवन में तबाही और बर्बादी पहले की तुलना में और ज्यादा बढ़ गई है।

उनके अच्छे दिन नहीं आए जिसका वादा मोदी सरकार ने 2014 में किया था लेकिन बुरे दिन और आ गए।

वेज कोड या मज़दूरी संगीता पारित हो चुकी है जिसके अनुसार मजदूर कर्मचारियों को घंटे व दिन के हिसाब से भी काम पर रखा जा सकेगा और मजदूरी दी जा सकेगी।

आपको बता दें कि धारा 6 और सत्र में यह लिखा गया है कि 8 घंटा कार्य दिवस का प्रावधान हट जाएगा और धारा 13 के अनुसार सरकार तय करेगी कि कार्य दिवस कितने घंटे का होगा।

जो 8 से ज्यादा भी हो सकता है। वहीं धारा 195 के अनुसार 15 साल से कम उम्र वाले बच्चों को भी काम पर रखना कानूनी हो जाएगा।

मालिको को अब मनमानी करने की खुली छूट

बोनस या वेतन में धोखाधड़ी पर भी मालिक की गिरफ्तारी का प्रावधान खत्म कर दिया जाएगा।

और मुकदमा करने पर भी क्रिमिनल की जगह सिविल केस बनेगा या नहीं मालिक केवल जुर्माना भरकर मुक्त हो जाएगा।

साथ ही संतोषजनक काम के बहाने मालिक को वेतन काटने की छूट रहेगी यानी बेतहाशा मनमानी की खुली छूट दी जाएगी।

मज़दूरों के वेतन के मामले में भी सरकार जो चाहेगी तय करेगी कोई कानून नहीं रहेगा कि किसको किस आधार पर कितना वेतन मिलेगा सरकार राजा की तरह होगी और मजदूर उसकी प्रजा, राजा जो चाहे उतनी मजदूरी मान्य होगी इसकी जगह समय जैसी किसी भी चीज का ध्यान रखना कानूनी बाध्यता अब नहीं रह जाएगा।

गौरतलब है कि मोदी सरकार 44 श्रम कानूनों को हटाकर उसके बदले 4 सैमसंग दाएं या लेबर कोर्ट ला रही है।

जिसमें से दो लेबर कोर्ट को संसद में पेश कर दिया गया है एक लेबर कोर्ट संसद से पास भी हो चुका है।

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One thought on “लेबर कोड के ख़िलाफ़ 9 सितंबर को देशव्यापी विरोध दिवस का आह्वान

  • September 4, 2019 at 8:59 am
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    It is a shame that this modi government policy is anti labour we should condemn this action

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