मज़दूर दिवस पर काम से निकाले गये डीयू सफाई कर्मचारी भूख हड़ताल पर

दिल्ली विश्वविद्यालय के 200 ज्यादा सफाई कर्मचारियों को मज़दूर दिवस के दिन काम से निकाल दिया गया।

10-15 सालों से लगातार काम करने के बाद अचानक एक सप्ताह पहले उन्हें बताया गया

कि सुलभ का ठेका खत्म होने के कारण 1 मई से उन्हें काम से हटा दिया जाएगा।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के सफाईकर्मी पिछले 10-15 सालों से विश्वविद्यालय में काम करते हुए इसे साफ रखने का काम कर रहे थे।

2005 से सुलभ इण्टरनेशनल के तहत उन्हें ठेके पर काम कराया जा रहा था।

सुलभ के साथ डीयू ने अपने कांट्रैक्ट को  ख़त्म कर नया ठेका  नेक्सजेन को दे दिया है।

कर्मचारियों को गलत तरीके से निकाला गया

सभी कर्मचारी विश्वविद्यालय के आर्ट फैकल्टी के बाहर 3 मई से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

कर्मचारियों ने डीयू के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।

उनकी इस लड़ाई में क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) शामिल हो गया है।

काम से निकाले गये सफाई कर्मचारियों ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि उन्हें गलत तरीके से निकाला गया है।

इस साजिश में सुलभ इंटरनेशनल और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोनों शामिल हैं।

धरने पर बैठे सफाई कर्मी @वर्कर्स यूनिटी
ओवरटाइम का भी पैसा नहीं मिलता था

सुलभ का कांट्रैक्ट खत्म किए जाने से सैकड़ों मजदूरों की नौकरी चली गयी है।

सुलभ को डीयू द्वारा 2005 में सफाई के काम के लिए अनुबंधित किया गया था।

इस दौरान उन्हें पीएफ ईएसआई की सुविधा भी नहीं दी जाती थी।

बल्कि उनको लंबे घंटे काम करवाने के बावजूद उनको ओवरटाइम का भी पैसा नहीं देती थी।

सुलभ इंटरनेशनल के  खिलाफ़ कोर्ट में मुकदमा

डीयू प्रशासन और सुलभ इंटरनेशनल के मजदूर विरोधी इस फैसले के खिलाफ़ कुछ सफाईकर्मियों ने मिलकर कोर्ट में मुकदमा किया है।

निकाले गये कर्मचारी समय पर उचित वेतन न मिलने के विरोध में भी बीते कई महीने धरना पर बैठे थे।

क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) का कहना है कि सुलभ का कांट्रैक्ट खत्म किए जाने से सैकड़ों मजदूरों की नौकरी चली गयी है।

डीयू ने अपनी  ज़िम्मेदारी से  पल्ला झाड़ लिया

डीयू, जो कि मुख्य नियोक्ता है, उसको यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि जो लोग पहले से कार्यरत थे,

उनको नयी कंपनी द्वारा काम पर रखा जाये| मगर डीयू ने अपनी इस ज़िम्मेदारी से पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया है।

यह इस पूरे मामले में डीयू की मिलीभगत दिखाता है, क्योंकि मजदूरों के हक सुनिश्चित करना उसी की ज़िम्मेदारी है।

कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें स्थायी नौकरी दी जाये और उनको भविष्य निधि की राशि एवं ईएसआई सुविधा दी जाए।

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