होंडा में 16 दिन बाद भी प्रबंधन ने नहीं मानी मज़दूरों की मांगें

होंडा के मानेसर प्लांट में मज़दूरों के आंदोलन को आज 16 दिन हो चुके हैं, बावजूद इसके अभी भी  कोई हल नहीं निकल सका है।

वर्कर्स यूनिटी को एक मज़दूर द्रारा फोन पर मिली जानकारी के अनुसार आंदोलन के 14वें दिन प्लांट के अंदर बैठें मज़दूरों द्रारा प्लांट खाली करवा दिया गया।

बीते दिन भी 4 से 5 घंटे तक समस्या के समाधान के लिए प्रबंधन से बातचीत हुई पर कोई समाधान नहीं निकल सका।

आज भी प्रबंधन ने समस्या के समाधान के लिए बातचीत का समय तय किया गया है।

मज़दूरों का कहना है कि इस बीच हमारी एकता को तोड़ने के लिए होंडा प्रबंधन ने तरह-तरह के प्रयास किए।

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होंडा में प्लांट के अंदर बैठें मज़दूरों का सहास तोड़ने के लिए उनको खराब खाना दिया जा रहा था।

खाने के नाम पर मज़दूरों को सिर्फ सेब और दूध दिया गया।

मज़दूरों ने बताया कि दिए जाने वाले फलों में कीड़े लगे होते थें और दूध भी खराब दिया जा रहा था, इस वजह से ज्यादातर मज़दूरों की हालत खराब हो गई और उनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

इतना ही नहीं मज़दूरों के इस्तेमाल वाले टॉयलेट को भी बंद कर दिया गया था, ताकि वो जल्द से जल्द हार मान कर पीछे हट जाएं।

प्लांट के अंदर बैठें मज़दूरों को बाहर तो निकाल दिया गया है पर मज़दूरों ने अभी तक अपना संघर्ष खत्म नहीं किया है बल्कि प्लांट के बाहर बैठकर अभी भी एकता के साथ प्रर्दशन कर रहें हैं।

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लिहाजा इतने दिनों तक चले संघर्ष के बाद भी अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है पर मज़दूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को नहीं माना जाएगा वो यहां से नहीं हिलने वाले।

गौरतलब है कि क़रीब ढाई सौ कैजुअल मज़दूरों को पांच नवंबर को कंपनी ने गैरकानूनी तरीके से निकाल दिया था और उसके बाद ही निकाले गए मज़दूर गेट पर ही धरने पर बैठ गए जबकि अंदर काम कर रहे कैजुअल मज़दूर टूल डाउन कर अंदर ही धरने पर बैठ गए।

14 दिनों तक इन मज़दूरों ने बहादुराना तरीक़े से संघर्ष किया और अंदर बैठे मज़दूर तो एक कपड़े में ही पूरे दो हफ़्ते बिताए थे।

अब देखना होगा कि संघर्षशील मज़दूर आगे की क्या रणनीति अख़्तियार करते हैं।

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