हड़ताल के बाद डॉक्टरों को मिली तीन महीने से रुकी सैलरी

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सबसे बड़े अस्पताल हिन्दूराव में कंट्रैक्ट पर कार्य कर रहे डॉक्टरों की तीन महीने से बकाया सैलरी आखिरकार मिल गई।

वेतन मिलने के साथ ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने मंगलवार को अपना अनशन ख़त्म कर दिया।

तीन माह से वेतन न मिलने से नाराज डॉक्टरों ने सोमवार को सड़क पर ही ओपीडी लगाकर मरीजों को देखा।

अस्पताल प्रशासन ने कोर्ट के निर्देश का हवाला देकर सड़क पर चल रही ओपीडी बंद करा दी थी।

डॉक्टरों की हड़ताल वेतन मिलने के साथ ही खत्म हो गई।

हिंदूराव हॉस्पीटल में ठेके पर रखे गए डॉक्टरों की हड़ताल
हिंदूराव हॉस्पीटल में ठेके पर रखे गए डॉक्टरों की हड़ताल
वेतन न मिलने पर भीख मांगने का फैसला

इससे पहले उत्तरी दिल्ली नगर निगम की आयुक्त वर्षा जोशी ने बताया था कि उन्हें दिल्ली सरकार से 206.5 करोड़ रुपये मिल गया है।

तय नियमों के अनुसार राशि को अस्पताल प्रशासन के खाते में भेज दिया गया है।

रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के बाद अब अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों ने भी हड़ताल की चेतावनी दे दी थी।

म्युनिसिपल डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरआर गौतम ने कहा कि सीनियर डॉक्टरों को भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है।

जिससे उनका घर चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में जल्द एसोसिएशन की जनरल बॉडी की बैठक बुलाकर हड़ताल पर फैसला लिया जाएगा।

वेतन न मिलने से नाराज डॉक्टर हड़ताल पर चले गए और वहीं कई डॉक्टरों ने भीख मांगने का फैसला किया।

सामुहिक आत्महत्या की अनुमति के लिए राष्ट्रपति को पत्र

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. संजीव चौधरी ने कहा कि डॉक्टरों के पास अब घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

जिससे वे सड़क पर आ गए हैं। इसके साथ ही डॉक्टरों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सामूहिक आत्महत्या की अनुमति मांगी है।

संजीव चौधरी ने बताया कि समय पर वेतन, पीने का साफ पानी, डाक्टरों को सुरक्षा, जूनियर व सीनियर डाक्टरों के लिए समय-समय पर साक्षात्कार करवाने के संबंध में प्रशासन से लगातार बातचीत भी चल रही है।

लेकिन अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम प्रशासन की ओर से नहीं उठाया गया है। इससे वे बेहद परेशान हैं।

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