होंडा आंदोलनः 14 दिनों बाद होंडा मज़दूरों ने प्लांट खाली किया

14 दिन से प्लांट के अंदर धरने पर बैठे होंडा मानेसर के मज़दूरों ने ट्रेड यूनियन काउंसिल के आश्वासन के बाद प्लांट खाली कर दिया है।

हालांकि गेट के बाहर धरना दे रहे वर्करों ने कहा कि उनका धरना जारी रहेगा।

अंदर धरने में मौजूद एक होंडा कैजुअल मज़दूर ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर वर्कर्स यूनिटी को बताया कि उन्हें बताया गया कि प्लांट में 13 दिनों से अधिक बैठने का नियम नहीं है इसलिए उन्हें बाहर निकलने को कहा गया।

हालांकि ये कहां का नियम है, और किसने ये बात कही ये पता नहीं चल सका है।

मज़दूरों ने  बताया कि सीटू और एटक समेत कई यूनियनों के मंच टीयूसी ने गुड़गांव में एक बैठक की और उसी प्लांट के अंदर धरना ख़त्म करने का निर्णय लिया गया।

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बैठक में मौजूद वर्करों ने बताया कि टीयूसी के नेताओं ने कहा कि लेबर अफ़सर ने कहा कि मैनेजमेंट का कहना है कि वर्कर अपने रुख में थोड़ी ढील दें तो मैनेजमेंट भी कुछ नरम रुख अपनाएगा।

फिलहाल मज़दूर प्लांट से बाहर निकल आए हैं, लेकिन मज़दूरों ने इस पर नाखुशी भी ज़ाहिर की है।

उनका कहना है कि मैनेजमेंट किसी तरह प्लांट खाली कराने की अपनी कोशिश में सफल हो गया है।

हालांकि आगे की रणनीति तय करने के लिए टीयूसी ने 20 नवंबर को गुड़गांव में एक और मीटिंग बुलाई है।

फिलहाल प्लांट के बाहर काफ़ी उहापोह की स्थिति कायम है।

मैनेजमेंट ने प्लांट को खाली कराने के लिए सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इस मामले में अगली तारीख़ 19 नवंबर को थी।

कथित तौर पर लेबर ऑफ़िस ने भी मज़दूर प्रतिनिधियों से कहा था कि अगर वो स्वतः प्लांट खाली नहीं करते तो ये मामला पुलिस प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।

क़रीब ढाई सौ कैजुअल मज़दूरों को पांच नवंबर को कंपनी ने गैरकानूनी तरीके से निकाल दिया था और उसके बाद ही निकाले गए मज़दूर गेट पर ही धरने पर बैठ गए जबकि अंदर काम कर रहे कैजुअल मज़दूर टूल डाउन कर अंदर ही धरने पर बैठ गए।

14 दिनों तक इन मज़दूरों ने बहादुराना तरीक़े से संघर्ष किया और अंदर बैठे मज़दूर तो एक कपड़े में ही पूरे दो हफ़्ते बिताए थे।

अब देखना होगा कि संघर्षशील मज़दूर आगे की क्या रणनीति अख़्तियार करते हैं।

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