उत्तराखंड रोडवेज़ के कर्मियों पर कर्मचारी संगठन का सदस्य होने पर लगा प्रतिबंध।

एक बार फिर से उत्तराखंड सरकार ने मज़दूर विरोधी क़दम उठाते हुए 500 रोडवेज कर्मचारियों पर यूनियन में शामिल होने पर प्रतिबंधित लगा दिया है।

महाप्रबंधक प्रशासन निधि यादव ने नया आदेश जारी कर 4200 ग्रेड-पे और इससे ज्यादा वेतन वाले कर्मियों को कर्मचारी संगठन की सदस्यता से बाहर करने को कहा है।

इसके अलावा निगम में 14 पद ऐसे घोषित कर दिए गए हैं जिन पर आसीन कर्मचारी किसी संगठन में सदस्यता नहीं ले सकते हैं।

उत्तराखंड रोडवेज में आठ यूनियन है लेकिन इनमें से तीन कर्मचारी संगठन प्रमुख माने जाते हैं, जिनमें कुल 6000 कर्मचारी हैं।

यूनियन में अधिकारी एवं कर्मचारी दोनों ही शामिल हैं।

फोटो साभार उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन
फोटो साभार उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के फेसबुक पेज से
यूनियन पर छह माह का एस्मा लागू

इनमें रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन और उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन हैं।

प्रबंधन ने कर्मचारियों के प्रति सख्ती अपनाई है। प्रबंधन ने यूनियन पर अपनी मांगों के लिए हड़ताल और धरना-प्रदर्शन करने पर छह माह का एस्मा लागू किया है।

वहीं महाप्रबंधक निधि यादव द्वारा जारी किए गए आदेश में बताया गया कि नियम के खिलाफ़ सुपरवाइजर, उपाधिकारी और अधिकारियों ने कर्मचारी संगठनों की सदस्यता ली हुई है।

ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 का हवाला देते हुए प्रबंधन ने 4200 व इससे ऊपर के ग्रेड-पे वाले सभी अधिकारियों को किसी संगठन की सदस्यता से प्रतिबंधित कर दिया है।

साथ ही ये चेतावनी भी दी गई कि अगर इस आदेश के बाद प्रतिबंधित किए गए अधिकारी और कर्मचारी, किसी भी संगठन की सदस्यता से जुड़े मिले तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रबंधन ने 14 पदों को किया प्रतिबंधित

जिनमें ड्यूटी लिपिक, सहायक यातायात निरीक्षक, यातायात निरीक्षक, कनिष्ठ केंद्र प्रभारी, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी, लेखाकार, चालक प्रशिक्षक, जूनियर फोरमैन, सीनियर फोरमैन, सहायक भंडारपाल, भंडारपाल, स्टोर अधीक्षक, प्रधान/मुख्य लिपिक और कार्यालय अधीक्षक हैं।

संयुक्त परिषद पर पड़ेगा असर

सरकार के इस फैसले का सबसे बुरा असर कर्मचारी संगठनों पर पड़ेगा जो लंबे अरसे से रोडवेज में काम कर रहे हैं।

इनमें जिन कर्मचारियों को संगठनों की सदस्यता लेने से प्रतिबंधित किया गया है, उनमें सबसे ज्यादा सदस्य परिषद के ही बताए जा रहे हैं।

वहीं, परिषद के प्रदेश प्रवक्ता विपिन बिजल्वाण ने कहा कि यह आदेश स्वीकारने योग्य नहीं है। प्रबंधन से वार्ता की जाएगी और आदेश बदला नहीं गया तो परिषद भी बड़ा कदम उठा सकती है।

उत्तरांचल रोडवेज़ कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि यह आदेश कर्मचारियों की आवाज़ दबाने को जारी किया गया है।

हालांकि  उन्होंने दावा किया कि इससे दो जुलाई से होने जा रहे यूनियन के प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

चौधरी ने कहा कि उनकी यूनियन में बड़ी संख्या चालकों और परिचालकों की है, जो इस आदेश की दायरे में नहीं हैं।

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