कश्मीर में फंसे हज़ारों मज़दूर, ट्रेड यूनियनों ने सरकारी फैसले का किया विरोध

जम्मू कश्मीर में पिछले पांच दिन से जारी अभूतपूर्व कर्फ्यू के कारण उत्तर भारत के हज़ारों मज़दूर फंस गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि अनुच्छेद 370 ख़त्म किए जाने के बाद हालात ख़राब हो गए हैं और वर्करों को खाने पीने तक की दिक्कतें आने लगी हैं।

यातायात और लैंडलाइन सेवाएं ठप

इस बीच ट्रेड यूनियनों ने बयान जारी कर मोदी सरकार के एकतरफ़ा फैसले की निंदा की है और कहा है कि वो कश्मीरी जनता के साथ खड़े हैं।

उधर तनाव के बीच वर्कर अपने घर जाने के लिए बस स्टैंडों पर जमा हो गए हैं लेकिन यातायात भी ठप होने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पूरे जम्मू कश्मीर में मोबाइल फ़ोन और लैंडलाइन सेवाएं बंद होने से मज़दूर अपने घर पर संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।

जम्मू के चेनाब घाटी और पीर पंजाल इलाक़ों से आए मज़दूर जम्मू रेलवे स्टेशन पर परेशान होते देखे जा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, भारी संख्या में वर्कर भदरवाह से अपने अपने घरों को वापस जा रहे हैं। अधिकांश मज़दूर दिन में अपनी दूरी तय कर रहे हैं।

स्थानीय लोग कर रहे हैं भारी परेशानियों का सामना

गौरतलब है कि जम्मू, कश्मीर घाटी और कारगिल लद्दाख में बड़े पैमाने पर उत्तर भारत के यूपी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम से आए मज़दूर काम करते हैं।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है यहां तक कि लोगों को रोज़मर्रे के सामान तक नहीं मिल पा रहे हैं क्योंकि दूध-सब्ज़ी की दुकानें तक बंद हैं।

कुछ नागरिकों ने बताया कि बीमारों को अस्पताल तक जाने से सड़कों पर पुलिस और सेना के जवान रोक कर वापस भेज दे रहे हैं।

यहां तक कि सरकारी कर्मचारियों को कर्फ्यू पास नहीं दिया गया है जिससे वो अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं और सरकारी कर्मचारियों को भी सेना के जवान गुजरने नहीं दे रहे हैं।

गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने सरकारी कर्मचारियों को आदेश जारी कर कार्यालय पहुंचने को कहा है और उनके बेरोकटोक आवागमन के निर्देश जारी किए गए हैं।

अहम मुद्दे से भटकाने के लिए सरकार ने उठाया फैसला

इस बीच जम्मू में कर्फ्यू में कुछ ढील दी गई है, जम्मू और जम्मू के बाहरी इलाकों में चौथे दिन गुरुवार को दुकानें खुलीं और धारा 144 में थोड़ी ढील दी गई।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने चीफ़ सेक्रेटरी और अपने सलाहकारों के साथ बैठक के बाद शुक्रवार की नमाज़ के लिए व्यवस्था करने को कहा और ईद के मौके पर दुकानों और बाज़ार खोलने की बात कही है।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने बयान जारी कर कहा है कि जिस साजिशाना तरीके से मोदी सरकार ने राज्य का विशेष दर्ज़ा खत्म किया है वो संवैधानिक नहीं है।

इस मुद्दे पर न तो कश्मीरी जनता को और ना ही संसद को विश्वास में लिया गया।

एटक की महासचिव अमरजीत कौर ने बयान में कहा है कि ऐसे समय में जब देश भारी मंदी की ओर बढ़ रहा है, नौकरियां जा रही हैं, श्रम क़ानून में भारी बदलाव किया जा रहा है,

मोदी सरकार ने ये कदम इन सवालों से भटकाने के लिए उठाया है।

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