टाटा स्टील में रात में भी काम करेंगी महिला खननकर्मी

जमशेदपुर स्थित इस्पात निर्माता कंपनी टाटा स्टील ने नोवामुंडी आयरन खानों में अपनी महिला कर्मचारियों को रात की पाली में काम करने की इजाजत दे दी है।

कंपनी का कहना है कि टाटा स्टील 1 सितंबर 2019 से खानों में सभी शिफ्टों में महिला कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली भारत की पहली कंपनी है।

दरअसल एक सितंबर से कंपनी ने यह प्रक्रिया ओएमक्यू डिवीजन में शुरू कर दी है।

इससे पहले कंपनी ने इसी साल एक अप्रैल से महिला कर्मचारियों के लिए अपने जमशेदपुर प्लांट के शॉप फ्लोर में दो शिफ्ट में शुरू की थी।

सुबह छह से रात दस बजे तक के बीच शिफ्ट ए और बी में अपने कोक प्लांट और इलेक्ट्रिकल रिपेयर शॉप फ्लोर में कुल 52 महिला कर्मचारियों को तैनात किया जा चुका है।

‘वूमेन एट माइंस’ नामक पहल

इस तरह से साल 2025 तक कार्यबल में 20 प्रतिशत महिला अधिकारियों को शामिल करने के कंपनी के लक्ष्य और कानून में हालिया संशोधनों के आलोक में ह्यूमैन रिसोर्स मैनेजमेंट डिवीजन और रॉ मेटेरियल डिवीजन ने ‘वूमेन एट माइंस’ नामक एक पहल की।

कंपनी का कहना है कि इस साल के शुरू में केंद्र द्वारा खान अधिनियम 1952 की धारा 46 को रद्द करने के बाद यह कदम उठाया गया है कि इस धारा के जरिए खानों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाई गई है।

टाटा स्टील के उपाध्यक्ष अरुण मिश्रा का कहना है कि कंपनी अपनी खानों के सभी वर्गों में ज्यादा महिलाओं को भर्ती करने के लिए सुविधाएं बढ़ा रहे हैं।

आगे वे कहते है कि महिलाओं को खानों में नौकरी देने से प्रगतिशील विचारों और दृष्टिकोणों की उत्पत्ति होती है।

महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर माहौल

इतना ही नहीं टाटा स्टील प्रबंधन ने माइंस और उसके आसपास महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर माहौल बनाने की कोशिश की है।

महिला कर्मचारियों के लिए ट्रांसपोर्ट सर्विस, रेस्ट रूम, सेनेटरी नैपकिंन वेंडिंग मशीन लगाने जैसी सुविधाएं शुरू की गईं हैं।

एक शिफ्ट में तीन से कम महिलाएं न हों और संबंधित कर्मचारियों से लिखित सहमति लेने के नियम के अनुपालन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

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