भीमा कोरेगांवः 1 साल से जेल में बंद कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग तेज़ हुई

महीनों और सालों से जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर शनिवार को प्रदर्शन किया गया।

क़रीब 35 संगठनों के संयुक्त कार्यक्रम में मज़दूर, छात्र, शिक्षक, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, भीम आर्मी के नेता, सांस्कृतिक कर्मी आदि शामिल हुए।

ये आयोजन भीमाकोरेगांव हिंसा में कथित भूमिका को लेकर गिरफ़्तार किए गए पांच बुद्धिजीवी, ट्रेड यूनियन एक्टिविस्ट, प्रोफ़ेसर, कलाकार और वकील- महेश राउत, रोना विल्सन, शोमा सेन, सुधीर धवले और सुरेंद्र गाडलिंग की गिरफ़्तारी के एक साल पूरे होने के मौके पर किया गया था।

इस तरह का आयोजन पिछले साल भी कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन यानी ‘सरकारी दमन के ख़िलाफ़ अभियान’ या ‘किस किस को क़ैद’ करोगे के बैनर तले किया गया था।

अभियान की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में प्रदर्शन को सफल क़रार देते हुए कहा गया है, “जनसभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम में पूरे देश भर से मेहनतकश आबादी के नुमाइंदे, कार्यकर्ता, किसान, छात्र और हरियाणा, झारखंड, दिल्ली, पंजाब, सीमांध्रा, तेलंगाना, पंजाब के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।”

ट्रेड यूनियनों की हिस्सेदारी

बयान के अनुसार, वक्ताओं में तेलंगाना से आए सिविल लिबर्टीज़ कमेटी के लक्ष्मन, एनटीयूआई के यूनियन लीडर गौतम मोदी, जेएनयू में प्रोफ़ेसर रहे चमन लाल, ऑल इंडिया फ़रम फार राइट टू एजुकेशन से जुड़े प्रोफ़ेसर विकास गुप्ता, पंजाब विश्वविद्यालय की स्टूडेंट लीडर कनुप्रिया, विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के दामोदर तुरी शामिल थे।

ट्रेड यूनियनों की ओर से एनटीयूआई, इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियन्स, हरियाणा की बेल सोनिका एम्प्लाइज़ यूनियन, लोक संघर्ष मंच से सुखविंदर कौर आदि थे।

इसके अलावा इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ पीपुल्स लॉयर के डॉ सुरेश कुमार, पीयूसीएल के एनडी पंचोली भी थे।

पिछले क़रीब पांच साल से जेल में बंद दिल्ली विश्वविद्याल के प्रोफ़ेसर जीएन साईंबाबा की पत्नी वसंथा भी वीमन अगेंस्ट सेक्सुअल वायलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन की ओर से कार्यक्रम में शामिल हुईं।

kis kis ko qaid karoge campaign against state repression @ WorkersUnity

हमले तेज़ हुए

अपने साथी की रिहाई की रिहाई के लिए पांच सालों से क़ानूनी लड़ाई लड़ रहीं वसंथा ने कहा कि सबका साथ सबका विकास के लिए ज़मीन पर काम कर रहे लोगों को जेल में डाल दिया गया है।

इफ़्टू के अनिमेश दास ने कहा कि जबसे मोदी पहले से भी मजबूत होकर सत्ता में आए हैं श्रम कानूनों पर हमले और तेज़ हो गए हैं।

पीयूसीएल के एनडी पंचोली ने ग़ैरक़ानूनी गतिविधि निरोधक क़ानून (यूएपीए) और राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) सरकरारी दमन तंत्र के हथियार हैं और इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए।

ग़ौरतलब है कि मुंबई में रिलायंस एनर्जी के आठ मज़दूरों पर यूएपीए लगाकर पिछले 15 महीनों से जेल में बंद करके रखा गया है।

kis kis ko qaid karoge campaign against state repression @ WorkersUnity

इसी तरह झारखंड की मज़दूर संघर्ष समिति (एमएसएस) पर ग़ैर क़ानूनी गतिविधि का आरोप लगाकर प्रतिबंधित कर दिया गया और उसके पदाधिकारियों को जेल में डाल दिया गया था।

वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ़ किसानी आबादी पर गौरक्षा के नाम पर पीट पीट कर की जाने वाली हत्याओं को दमन का हथियार बना दिया गया है दूसरी तरफ़ झूठे मुद्दे खड़ा कर पीछे से मालिक वर्ग की सेवा के मनमुताबिक श्रम कानून बदल कर मज़दूर वर्ग पर हमला बोला जा रहा है।

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