पहली निजी ट्रेन तेजस को ग़ाज़ियाबाद में रेलवे कर्मियों ने रोका

देश की पहली तेजस ट्रेन चलने के ख़िलाफ़ शुक्रवार को रेलकर्मियों का गुस्सा फूटा।

नरेंद्र मोदी सरकार भारतीय रेलवे का निजीकरण कर रही है, हाालंकि खुद प्रधानमंत्री ने बनारस की रेकर्मियों की एक सभा में कहा था कि ‘मैं मर जाउंगा लेकिन रेलवे को बिकने नहीं दूंगा।’

उन्होंने ट्रेन से अपने बचपन के रिश्ते को भी उस समय याद किया था और रेलवे कर्मचारियों को भरोसा दिलाया था।

लेकिन दोबारा सत्ता में आते ही उन्होंने पहले रेलवे में भारी पैमाने पर छंटनी के आदेश दिए, फिर देश भर में मौजूद सात रेलवे कारखानों को निगमीकरण करने का फैसला ले लिया, जिसका मतलब है कि वो निजी हाथों में दे दिया जाएगा।

साथ ही नरेंद्र मोदी ने दो निजी ट्रेनें चलाने को भी हरी झंडी दे दी जिनका नाम तेजस एक्सप्रेस है।

पहली तेजस लखनऊ से दिल्ली शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना की।

लेकिन ग़ाज़ियाबाद में रेलवे कर्मचारियों ने पटरी पर आंदोलन कर दिया और ट्रेन रोकने की कोशिश की।

यूपी पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ़ के भारी सुरक्षा बंदोबस्त में प्रदर्शनकारियों को ट्रैक से हटाया गया और ट्रेन को दिल्ली रवाना किया गया।

रेलवे कारखानों के निगमीकरण के ख़िलाफ़ पहले से आक्रोश है। ट्रेड यूनियनों नेताओं ने कहा है, ये मोदी सरकार पर भारी पड़ेगा।

दूसरी तेजस ट्रेन अहमबाद से मुंबई चलेगी। रेल ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ये सबे व्यस्त रूट रेलवे का और इस रूट पर मुनाफ़ा कमाने के लिए निजी कंपनियों को मोदी सरकार ठेका दे रही है।

रेलवे ट्रेड यूनियन पीआरकेयू के नेता राकेश मिश्रा का कहना है कि उन जगहों पर निजी कंपनियों को ट्रेन चलाने के लिए मोदी सरकार क्यों नहीं देती, जहां ट्रेन की बहुत कम या नहीं के बराबर सुविधा है?

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