आज का चक्का जाम ऐतिहासिक होने वाला है

देश की 10 बड़ी ट्रेड यूनियनों की अपील पर आठ जनवरी को देशव्यापी चक्का जाम होने जा रहा है। कई मायने में ये ऐतिहासिक होने वाला है।

लेबर कोड के मार्फ़त श्रम कानूनों को ख़त्म करके मोदी सरकार ने एनआरसी और सीएए का राग शुरू कर दिया है और इसने असंतोष में और घी का काम किया है।

छह जनवरी को दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई प्रेस कांफ्रेंस में सीटू के जनरल सेक्रेटरी तपन सेन ने कहा कि इस बार की हड़ताल में क़रीब 175 किसान संगठन भी शामिल हैं।

एटक की जनरल सेक्रेटरी अमरजीत कौर ने कहा कि ट्रेड यूनियनों की मांगों में सीएए को वापस लेने की भी मांग शामिल कर दी गई है।

उन्होंने वर्कर्स यूनिटी के खास बातचीत में कहा कि देश भर के अधिकांश विश्विविद्यालय के शिक्षक और छात्र भी इस हड़ताल में शामिल होंगे।

तपन सेन ने वर्कर्स यूनिटी से कहा कि ये आम हड़ताल पूरे देश में ऐतिहासिक नाफ़रमानी के आंदोलन में तब्दील होगा।

उल्लेखनीय है कि एनआरसी के विरोध करने पर जामिया के छात्र छात्राओं पर बर्बर लाठी चार्ज किया गया, जबकि दो महीने से फ़ीस वृद्धि को वापस करने के लिए जेएनयू के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

पांच जनवरी, रविवार को कैंपस में हथियारबंद गुंडे घुस गए और लड़कियों के हॉस्टल में घुस कर छात्राओं पर जानलेवा हमले किए।

ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि इस बार क़रीब 25 करोड़ मज़दूर, कर्मचारी चक्का जाम में हिस्सा लेंगे।

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