शिवम ऑटो मज़दूरों के धरने का 8वां दिन, नहीं हो पाया समझौता

गुड़गांव के शिवम ऑटोटेक लि. बिनोला कंपनी में मज़दूरों के धरने का बुधवार को आठवां दिन हो गया लेकिन अभी तक समझौता परवान नहीं चढ़ा।

मज़दूरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन 14 सितम्बर 2019 को हुए वेतन समझौते को लागू करने को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है।

देश भर में आठ जनवरी को आम हड़ताल से एक दिन पहले 7 जनवरी से कंपनी के अंदर शिफ़्ट ए के मज़दूर धरने पर हैं जबकि बाहर बी शिफ़्ट के मज़दूर रात दिन धरना दिए हुए हैं।

आठ दिन से कंपनी में धरनारत मज़दूरों को बाहर से खाना पहुंचाया जा रहा है और कुछ मज़दूरों के बीमार होने की भी ख़बर है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 60 दिन से मानेसर के होंडा प्लांट के 2500 मज़दूर धरने पर बैठे हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद कोई हल नहीं निकल रहा है।

shivam auto tech strike

शिवम ऑटो लि. की यूनियन बॉडी के सदस्य मुकेश कुमार यादव ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि अब तक मैनेजमेंट और डीएलसी के साथ दो बैठकें हो चुकी हैं लेकिन प्रबंधन एरियर देने पर चुप्पी साधे हुए है।

उन्होंने कहा कि समझौते के बाद 15 मज़दूरों ट्रांसफर कर दिया गया था और यूनियन बॉडी के तीन लोगों को स्सपेंड कर दिया गया था।

प्रबंधन उन सबको वापस लेने पर राज़ी हो गया है लेकिन बढ़े वेतन को कब लागू करेंगे और कब एरियर देंगे इस पर कोई बात आगे नहीं बढ़ पा रही है।

मैनेजमेंट ने 10 जनवरी को हुई पहली बैठक में कहा था कि एरियर देने की वो तारीख़ बताएंगे लेकिन 14 जनवरी को हुई बैठक में इस पर कुछ नहीं कहा।

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कंपनी में जून 2018 से वेतन समझौता पेंडिंग था और 14 सितम्बर 2019 को मैनेजमेंट और यूनियन में समझौता हुआ।

इस समझौते के अनुसार जून 2018 से बकाया एरियर का आधा हिस्सा दीपावली में और बचा हुआ दिसम्बर माह की सैलरी में देने की बात कही गई थी।

लेकिन अभी तक वो दिया नहीं गया। वेतन समझौते के अनुसार, 4300 रुपये की बढ़ोत्तरी होनी थी लेकिन न वेतन समझौता लागू हुआ और न एरियर मिला।

प्लांट में प्रबंधन और मज़दूर यूनियन के बीच माँगों लेकर गतिरोध बना हुआ है।

गौरतलब है कि 18 मज़दूरों का तबादले और निलम्बन के बहाने गेट बंद करके बाहर कर दिया गया था।

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मज़दूरों का आरोप है कि प्रबंधन लंबे समय से यूनियन तोड़ने का प्रयास कर रहा है। यूनियन पदाधिकारियों का गेट बन्द करने से लेकर, यूनियन को बायपास कर मज़दूरों से बात करने तक का हथकंडा अपना रहा है।

कंपनी में क़रीब साढ़े चार सौ अस्थाई मज़दूर हैं जबकि इसका दोगुना अस्थाई मज़दूर हैं।

सात तारीख़ शाम से कम्पनी में उत्पादन ठप्प है। कैज़ुअल मज़दूरों को भी काम पर आने से मना कर दिया गया है।

यूनियन के सदस्यों का कहना है कि कम्पनी प्रबंधन खुलेआम लगातार श्रम क़ानूनों की धज्जियां उड़ा रहा है। और श्रम विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।

ऐसे ही कई मामले इस पूरी औद्योगिक पट्टी में लम्बित हैं।

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