मज़दूर वर्ग क्या सीख सकता है शाहीन बाग़ के आंदोलन से?

जनता की डुअल पॉवर या दोहरी सत्ता का अनोखा उदाहरण बन गया है दिल्ली के शाहीन बाग की महिलाओं बच्चों का आंदोलन।

नागरिकता क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ दो हफ़्ते से ये धरना जारी है। ये लोग एनएच 24 पर शामियाना लगाकर बैठे हैं।

महिलाएं, बच्चे बुजुर्ग, छात्र दिन रात दे रहे हैं। दिलचस्प ये है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच एक किस्म का शक्ति संतुलन स्थापित हो गया है।

हालांकि धरना ख़त्म करने का तरह तरह का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन लोग डटे हुए हैं।

ये एक किस्म का ‘डुअल पॉवर’ का उदाहरण है। आम तौर पर आंदोलनों में पुलिस धरना ख़त्म करवा देती है, लेकिन शाहीन बाग की महिलाएं डटी हुई हैं।

डुअल पॉवर के बारे में महान मज़दूर नेता लेनिन ने लिखा है कि क्रांति में राज्य सत्ता का सवाल सबसे अहम होता है।

क्रांति का अहम पड़ाव होता है डुअल पॉवर स्थापित करना। सीधे लब्ज़ों में समझें तो डुअल पॉवर का मतलब होता है, जनता की सत्ता का बढ़ना।

मज़दूर वर्ग इस आंदोलन से बहुत कुछ सीख सकता है।

डुअल पॉवर के बारे में और जानना है तो लेनिन का ये लेख पढ़ें- https://www.marxists.org/archive/leni…

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