post साहित्य Archives - Workers Unity

एक मामूली ऑपरेशन बिना मर गया मेरा एक मज़दूर साथी

(चंद्रा की कविताएं किसी भट्टी से निकले तपते हुए लोहे जैसी हैं। इनमें दुखः, क्षोभ, आक्रोश और वो सारी संवेदनाएं

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